अगस्ता वेस्टलैंड में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण के बाद अब मोदी सरकार जोर-शोर से कारोबारी विजय माल्या को स्वदेश लाने में जुटी है. लंदन के कोर्ट ने माल्या के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी भी दे दी है. भारत इसे बड़ी जीत के रूप में देख रही है. हालांकि माल्या के पास वहां की ऊपरी अदालत में अपील करने के विकल्प मौजूद हैं.  
अगर मोदी सरकार विजय माल्या को भारत लाने में कामयाब रहती है तब यह सरकार के लिए बड़ी जीत मानी जाएगी. जनता में यह मैसेज जाएगा कि सरकार अब देश के साथ धोखाधड़ी करने वाले किसी आरोपी को नहीं छोड़ेगी. साथ ही वित्त मंत्री अरुण जेटली के लिए माल्या की वापसी बड़ी राहत की खबर होगी.
जब माल्या ने लिया जेटली का नाम

क्योंकि खुद माल्या ने भारत छोड़ने से पहले सेटलमेंट के लिए अरुण जेटली से मुलाकात की बात कही है और तभी से जेटली विपक्ष के निशाने पर हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो विजय माल्या को भारत से भगाने में अरुण जेटली पर कथित मदद का आरोप भी लगाया है.
इसलिए जैसे ही सोमवार को लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट से विजय माल्या की प्रत्यर्पण को मंजूरी मिली, खुद अरुण जेटली ने ट्वीट कर खुशी जताई, उन्होंने लिखा, 'आज भारत के लिए बड़ा दिन है. भारत से धोखाधड़ी करने वाला कोई भी सजा से नहीं बचेगा. एक अपराधी को यूपीए सरकार के दौरान फायदा पहुंचाया गया था. हालांकि एनडीए सरकार उसको वापस ला रही है.'
माल्या की वापसी और 2019 का चुनाव?
अरुण जेटली के ट्वीट से साफ है कि माल्या की वापसी से उनके ऊपर जो दाग लगे हैं वो तो धुलेंगे ही, साथ ही विपक्ष को चुप कराने के लिए मोदी सरकार को बड़ा हथियार हाथ लग जाएगा. हालांकि सरकार की कोशिश रहेगी की किसी भी तरह से 2019 लोकसभा चुनाव से पहले माल्या को भारत लाने में कामयाबी मिल जाए. माल्या की वापसी से सरकार की छवि जो जनता में थोड़ी धूमिल हुई है और चमक उठेगी और फिर लोकसभा चुनाव में 'माल्या की वापसी' 'सरकार की वापसी' की राह को आसान कर सकती है.